पकोड़ा 'सुन रहा है न तू रो रहा हूँ में'
पहले चाय अब पकोड़ा बेचारे पकौड़े को भी आखिरकार चाय पर चर्चा के बाद तवज्जो मिली|
मैंने क्या किया मुझे क्यों राजनीती से जोड़ा, में तो मिटा रहा था भूखों की भूख को थोड़ा, क्यों फसाया में बन गया ना कुछ लोगों के लिए रोड़ा ,राजनैतिक कठपुतली बना दिया मुझे में तो हूँ सीधा साधा पकोड़ा| मेरी कलम आदर्श दुबे ९९९३८८८११४युवाओं को रोजगार से पकोड़े सम्बन्ध को समझना भद्दा मजाक लग रहा है और एक बड़ा युवा वर्ग जो बड़ी डिग्री लेकर भृत्य की नौकरी तलाश रहा है उसे तो कुछ ज्यादा ही बुरा लग रहा है, एक तो करेला उसमें नीम चढ़ा कहावत आज के परिपेक्ष्य में सिद्ध हो रही कही न कहीं बड़ा युवा वर्ग देश में चल रही सियासत और बयानवाजी से नाखुश है ,बयानबाजी का अशर हुआ है और युवा सड़क पर आ कर विरोध प्रदर्शन कर रहा है और अपने भविष्य के जीवन संघर्ष को इस सियासत युद्ध में देख रहा है|
चाय और अब पकोड़ा
घेर रहा विपक्ष
युवक कांग्रेस कार्यकर्त्ता अनूपपुर स्टेशन चौक में पकोड़े बेचकर करेंगे विरोध
रोजगार पर प्रधानमंत्री के पकौड़े पर दिए गए बयान पर
सियासत पहले से ही जारी है और अनूपपुर में युवक कांग्रेस के सौजन्य से पकोड़े बेचकर सरकार की नीतियों का विरोध किया जायेगा |
आदर्श दुबे अनूपपुर
No comments:
Post a Comment