Thursday, 10 April 2025

अनूपपुर जिला मुख्यालय स्थित कंपोजिट शराब दुकान में खुलेआम MRP से अधिक दर पर शराब की बिक्री, आबकारी विभाग मौन ठेकेदार वीरेंद्र राय डाल रहा ग्राहकों के जेब में डंके की चोट पर डाका।

अनूपपुर जिला मुख्यालय की कंपोजिट शराब दुकान में खुलेआम MRP से अधिक दर पर शराब की बिक्री, आबकारी विभाग मौन ठेकेदार वीरेंद्र राय डाल रहा ग्राहकों के जेब में डांका राजस्व की कर रहा चोरी ।


अनूपपुर, 10 अप्रैल 2025 

रिपोर्ट आदर्श दुबे 8770125570

जिले के विभिन्न शराब दुकानों एवं जिले मुख्यालय की कंपोजिट शराब दुकान में एम.आर.पी. से अधिक दर पर शराब की बिक्री का सिलसिला बेधड़क जारी है। ग्राहकों से मनमाने दाम वसूले जा रहे हैं, और हैरानी की बात यह है कि बिल देने का कोई प्रावधान तक नहीं रखा गया है। इससे न केवल उपभोक्ताओं को आर्थिक नुकसान हो रहा है, बल्कि यह सीधे-सीधे राजस्व चोरी की आशंका भी पैदा करता है। हमारे खुफिया ग्राहकों ने ऑनलाइन पेमेंट किया है जिसकी सारी फोटो हमारे पास है ग्राहकों को वीरेंद्र राय और उसके कर्मचारी डंके की चोट पर लुट रहे है। 

स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि दुकानदार सरकारी तय मूल्य (MRP) से ₹20 से ₹100 तक अधिक कीमत पर शराब बेच रहे हैं। कई बार ग्राहक बिल की मांग करते हैं, तो उन्हें मना कर दिया जाता है, जिससे यह संदेह और गहरा जाता है कि यह कार्य आबकारी विभाग की मिलीभगत से हो रहा है या फिर विभाग की लापरवाही का परिणाम है।

क्या कहता है कानून?

मध्यप्रदेश आबकारी अधिनियम 1915 के अनुसार,

शराब की बिक्री केवल लाइसेंस प्राप्त दुकानों से निर्धारित मूल्य पर ही की जा सकती है।

किसी भी विक्रेता को निर्धारित मूल्य से अधिक राशि लेना अपराध की श्रेणी में आता है।

ग्राहकों को बिल देना अनिवार्य है, जिससे लेन-देन पारदर्शी बना रहे।

इसके अलावा, उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 के तहत कोई भी व्यापारी यदि वस्तु या सेवा का मूल्य अधिक वसूलता है या बिल नहीं देता है, तो ग्राहक उपभोक्ता फोरम में शिकायत दर्ज कर सकता है।

आबकारी विभाग क्यों मौन है?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि इन दुकानों की नियमित निगरानी और मूल्य निर्धारण की जाँच आबकारी विभाग क्यों नहीं कर रहा?

क्या विभाग को इन शिकायतों की जानकारी नहीं है, या फिर शिकायतों को नजरअंदाज किया जा रहा है?

स्थानीय जनप्रतिनिधियों और जागरूक नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि:

शराब दुकानों की ऑडिटिंग कराई जाए,

MRP से अधिक वसूली पर कड़ी कार्रवाई की जाए,

और ग्राहकों को बिल देना अनिवार्य रूप से सुनिश्चित किया जाए।

जब तक प्रशासन इस मुद्दे पर सख्त कार्रवाई नहीं करता, तब तक ऐसी दुकानें उपभोक्ताओं की जेब पर डाका डालती रहेंगी और कानून की धज्जियाँ उड़ती रहेंगी।

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