Tuesday, 24 September 2019

अनूपपुर बन रहा तेजी से रोजगार हब.

***एक कंपनी सैकडों युवाओं को सिखा रही करोडपति बनने के गुर .


( चुभती बात --- मनोज कुमार द्विवेदी)
 
अनूपपुर /  किसी पिक्चर का हीरो पुलिस कमिश्नर का जमीर जगाने की कोशिश करते हुए कहता है कि यदि पुलिस चाह ले तो कोई मन्दिर के बाहर से चप्पल तक नहीं चुरा सकता। बात सही थी, दर्शकों से तालियां भी मिलीं। लेकिन कुछ लोगों को  यह हीरो का एक पक्षीय नजरिया अधिक लगा । व्यावहारिक जीवन में आम व्यक्ति यह जानता है कि  एक पुलिस को कितने सारे अधिकारियों, नेताओं , पत्रकारों , पत्रकारों के छोटे छर्रों, अन्य बहुत से लोगों के साथ अपना परिवार भी पालना पोसना पडता है । इसके लिये नौकरी बचाने , सत्तारुढ नेताओं के इशारे पर उल्टा सीधा भी करना पडता  है।
  *** अब अनूपपुर जिले को ही लें ,  पिछले तीन -- चार माह से अनूपपुर जिले को बाहरी युवाओं के लिये रोजगार का हब बनाने पर उतारु एक कंपनी की गतिविधियां भले ही पूरे नगर , सारे पत्रकारों को संदिग्ध लगे...अब पुलिस, प्रशासन को उसमे कुछ भी संदिग्ध नहीं लग रहा तो कोई क्या कर सकता है। ऐसे मामले में जिसमें जब मियां + बीवी राजी तो क्या करेगा काजी की तर्ज पर काम हो रहा हो तो वहाँ मीडिया या जनता सिर्फ गला ही फाड सकती है। 
 दूसरी ओर कल्याणकारी पत्रकारिता के समान्तर सूर्पणखा छाप पत्रकारिता का संशोधित स्वरुप देखने को मिल रहा है । इसलिये जिम्मेदार विधायिका, कार्यपालिका, न्याय पालिका के साथ आम जनता के बीच पत्रकारिता की साख मृत प्राय हो गयी है। 
***  हालिया मामले मे एक कंपनी अनूपपुर जैसे छोटे जनजातीय जिले में सैकडों युवाओं को रोजगार देने के नाम पर प्रशिक्षण की दुकान खोल लेती है। इसकी सूचना तथाकथित रुप से कलेक्टर, एसपी व कोतवाली को दी या नहीं ,  भवन के लिये उसने नगरपालिका से अनुमति ली या नहीं इन सब सवालों से परे उस दुकान ( संस्थान या ट्रेनिंग सेंटर इसलिये नहीं क्योंकि उन्होंने इसे मार्केटिंग के रुप में प्रचारित किया है) में जब शहडोल संभाग से बाहर के जिलों से लाए गये पांच -- सात सॊ युवक युवतियां रोजगार के लिये  सुबह से देर शाम तक एक स्थान पर जुटने लगे तथा प्रशिक्षण के नाम पर  हो हल्ला मचाने लगे, नारे बाजी करने लगे तो मोहल्ले तथा नगर के लोगों की उत्सुकता जागी। लाख पता करने पर भी कोई ये नहीं बता पाया कि दडबे नुमा छोटे से कमरे मे सैकडों लोग रोज क्या कर रहे हैं । समाचार पत्रों , चैनलों मे जब खबरें छपीं  , प्रसारित हुई तो पहले मीडिया मैनेजमेंट के प्रयास हुए। बात तब भी नहीं बनी तो पत्रकारों को पहले स्वत: , फिर किसी वकील से डराने , धमकाने का प्रयास भी किया गया ।
*** नियमित समाचार प्रकाशन के विरुद्ध प्रशासन पर दबाव बनाने के लिये २४ सितंबर, मंगलवार को दर्जनों युवक युवतियों को कलेक्टर कार्यालय, थाने  ले जाकर पत्रकारों के विरुद्ध शिकायत की गयी।
  *** अब ऐसा भी नहीं है कि मामले की जानकारी अधिकारियों को नहीं थी। कलेक्टर चन्द्रमोहन ठाकुर जागरुक व लोकप्रिय प्रशासनिक अधिकारी हैं। उन्होंने समाचार के माध्यम से मामला उजागर होने पर एसडीएम से प्रारंभिक जांच करवाई तो दूसरी ओर पुलिस अधीक्षक किरणलता केरकेट्टा ने भी नगर निरीक्षक प्रफुल्ल राय तथा अन्य माध्यमों से जांच करवा लिया। जांच का परिणाम ये हुआ कि उक्त कंपनी ने आनन फानन दुकान मे शटर बन्द करके दूसरी जगह दुकान खोल ली।
अब कलेक्टर ने दोनो पक्षों ( कंपनी + मीडिया) की बातें सुनने के बाद स्वतंत्र जांच करवाने की बात कही है।
*** यद्यपि मामले मे प्रशासन को कुछ भी संदिग्ध नहीं लग रहा। लेकिन कुछ गंभीर यक्ष प्रश्न जनता , मीडिया के सामने अब भी हैं । जैसे ....
1 -- कंपनी का संचालक झारखंड का बतलाया जा रहा है , उसने इस दुकान के संचालन के लिये प्रदेश के सीमावर्ती आदिवासी जिले को ही क्यों चुना ?
2 -- सूत्रों के अनुसार यह कंपनी शहडोल संभाग से बाहर के पांच से सात सॊ लोगों को आवासीय प्रशिक्षण दे रही है। इसमे विदिशा, रायसेन, उज्जैन, भोपाल,भिण्ड जैसे दूरस्थ जिलों के युवक युवतियां हैं , जो इस कंपनी के कारिंदो की देख रेख मे कमरे लेकर रह रहे हैं। इन्हे स्थानीय किसी व्यक्ति या लोगों से मिलने ,बात करने की सख्त मनाही क्यों है ? सब कुछ गोपनीय क्यो रखा जा रहा है ?
3 --- रायसेन का एक युवक जो इनके चंगुल से निकल भागा , उसने बतलाया कि प्रत्येक व्यक्ति से जाब दिलाने का प्रलोभन देकर १८-- १९ हजार  रुपये ऐंठे गये तथा उन्हे अनूपपुर प्रशिक्षण के नाम पर बुलवा लिया गया।
4 --- यहाँ आने वाले युवक युवतियों को अब कंपनी अपने प्रोडक्ट बेंचने के गुर सिखा रही है। मार्केटिंग का प्रशिक्षण देना, लोगों को आत्मनिर्भर बनाना कोई गलत बात नहीं है। लेकिन क्या यह कंपनी इसके लिये अधिकृत है ?
5-- यदि कंपनी लोगों को मार्केटिंग के गुर सिखा रही है तो भोपाल, इन्दौर, जबलपुर जैसी बडी जगह छोड कर अनूपपुर को उन्होंने क्यों चुना ?
6 -- अनूपपुर छत्तीसगढ़ से लगा संवेदनशील नक्सल प्रभावित जिला रहा है। जहाँ गंभीर नक्सली वारदात ना होने के बावजूद केन्द्र व राज्य सरकार अतिरिक्त सतर्कता बरतती रही है। ऐसे मे सैकडों युवाओं का एकत्रीकरण के लिये क्या प्रशासन की अनुमति ली गयी है ?
6 -- क्या पुलिस व जिला प्रशासन ने ऐसी किसी गतिविधियों के लिये इन्हे विधिवत अनुमति प्रदान की है ?
7 -- क्या कंपनी प्रशिक्षण संबंधी नियमों का पालन कर रही है ?
8 -- जिस स्थान पर सैकडों लोगों को एकत्रित कर प्रशिक्षण दिया जा रहा है क्या वह सुरक्षा मानकों के अनुरुप है ?
9 -- जिले से बाहर से बहुत से लोग आकर यहाँ किराये के मकानों का सामूहिक उपयोग कर रहे हैं। क्या इसकी विधिवत सूचना पुलिस को दी गयी है ? क्या मकान मालिकों ने व कंपनी ने इसकी सूचना पुलिस को दी है ?
10--  पिछले चार माह से बिना किसी अनुमति के यह कंपनी जिले मे गतिविधियां कर रही है । क्या प्रशासन ने इसकी संबद्धता , इनकी पृष्ठभूमि जांचने की कोशिश की ?
11-- यदि नगर निरीक्षक व एस डी एम ने इस संस्थान की जांच की है तो निष्कर्षत: प्रशासन ने क्या कार्यवाही की ?
12-- यह कि कंपनी ने नगरपालिका, पुलिस व प्रशासन को सूचना दी या अनुमति मांगी ? दोनों ही मामलों मे उन्होंने बाहरी सैकडों युवाओं को महीनो यहा  एकत्रित रखने का क्या कारण बतलाया ? क्या उनके पास किसी सक्षम पंजीकृत संस्थान से प्रशिक्षण की संबद्धता है ? तथा यह भी कि जो प्रोडक्ट्स वे युवाओं से बाजार या घर घर मे बिकवाना चाहते हैं ,उसकी गुणवत्ता की पुष्टि किसने की ?
13--- यह कंपनी यहाँ से लाखों रुपये का व्यवसाय कर रही है। क्या यह स्थानीय निकाय व राज्य -- केन्द्र की टैक्स संबंधित प्रक्रियाओं को पूरा कर रही है ?
14-- सबसे अंतिम लेकिन सबसे महत्वपूर्ण यह कि कल या बाद मे युवाओं द्वारा ( जैसा कि पहले बहुत बार हो चुका है) छले जाने , धोखाधडी की शिकायते मिलीं तो इसका जिम्मेदार कॊन होगा ?
  जाहिर है कि जिले मे कंपनी के संचालन पर स्थानीय मीडिया ने प्रशासन व समाज का ध्यानाकर्षण कर अपना दायित्व पूरा किया है। कंपनी तथा उसके प्रशिक्षुओं की गतिविधियों के कारण सवाल उठे हैं। प्रशासन का दायित्व है कि वह सक्षम जांच करवा कर सभी संदेहों को दूर करे। कंपनी को भी पूरा अधिकार है कि यदि उसे लगता है कि कोई उसे बेवजह परेशान कर रहा है, डरा -- धमका रहा है या ब्लैकमेल कर रहा है तो वह उचित मंच पर सही कार्यवाही की मांग करे ना कि लालच , प्रलोभन या धमकी का रास्ता अख्तियार करे।

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