साहित्यकार मुंसी प्रेमचंद्र के विचारों को किया याद ,लायंस क्लब के साथ तुलसी महाविद्यालय के सहयोग से हुई संगोष्ठी एवं पौध रोपण ।
रिपोर्ट आदर्श दुबे📝
शासकीय तुलसी स्नातक महाविद्यालय अनूपपुर में प्रेमचंद जयंती पर कई कार्ययकर्म आयोजित हुये , पहले सौपान में महाविद्यालय के छात्र छत्राओं का साहित्य के प्रति रुचि बढ़ाने भाषण लेखन प्रतियोगिता आयोजित हुई तथा दूसरे सौपान मैं लायंस क्लब के साथ मिलकर वृक्षारोपण किया गया ,जहां क्लब की महिलाओं के साथ महाविद्यालय के छात्र छात्रओं ने पौधे लगाए , महान साहित्यकार मुंसी प्रेमचंद पर संगोश्ठी आईजित की गई जिसमें साहित्यकार उदय प्रकाश जी की धर्म पत्नी कुमकुम सिंह के साथ ,सामाजिक कार्यकर्ता गिरीश पटेल, प्राचार्य तुलसी महाविद्यालय परमानंद तिवारी लायंस क्लब की अध्यक्षा करुणा सोनी एवं मुख्य वक्ता के रूप में ब्रजेन्द्र सोनी मौजूद रहे
विचार व्यक्त करते हुए अधिवक्ता विजेंद्र सोनी ने कहा 1936 में जब प्रगतिशील लेखक संघ के पहले सम्मेलन की प्रेमचंद अध्यक्षता कर रहे थे उन्होंने कहा था कि लेखक स्वभाव से "प्रगतिशील होता है और जो ऐसा नहीं है वह लेखक नहीं है "
इसी तरह प्रसिद्ध दार्शनिक जयपाल सात्र ने इसी बात को रेखांकित किया था "जो बुद्धिजीवी समाज के लिए प्रतिबद्ध नहीं होता वह बुद्धिजीवी नहीं होता"
प्रेमचंद ने आगे भी यह बात कही थी कि मौजूदा समय में राजनीति के आगे लेखक को मशाल लेकर के चलना चाहिए !
जब हम अपने इर्द-गिर्द इस तरह राजनैतिक वातावरण को देखते हैं स्पष्ट हो जाता है याद जो राजनीत है उससे साहित्य बहुत दूर हो गई है, और जब जब राजनीति साहित्य से दूर हुई है" राजनीति आवारा हो गई! समारोह में अन्य वक्ताओं ने भी अपने विचार रखें मंच का संचालन डॉक्टर नीरज श्रीवास्तव ने किया।
रिपोर्ट आदर्श दुबे📝
शासकीय तुलसी स्नातक महाविद्यालय अनूपपुर में प्रेमचंद जयंती पर कई कार्ययकर्म आयोजित हुये , पहले सौपान में महाविद्यालय के छात्र छत्राओं का साहित्य के प्रति रुचि बढ़ाने भाषण लेखन प्रतियोगिता आयोजित हुई तथा दूसरे सौपान मैं लायंस क्लब के साथ मिलकर वृक्षारोपण किया गया ,जहां क्लब की महिलाओं के साथ महाविद्यालय के छात्र छात्रओं ने पौधे लगाए , महान साहित्यकार मुंसी प्रेमचंद पर संगोश्ठी आईजित की गई जिसमें साहित्यकार उदय प्रकाश जी की धर्म पत्नी कुमकुम सिंह के साथ ,सामाजिक कार्यकर्ता गिरीश पटेल, प्राचार्य तुलसी महाविद्यालय परमानंद तिवारी लायंस क्लब की अध्यक्षा करुणा सोनी एवं मुख्य वक्ता के रूप में ब्रजेन्द्र सोनी मौजूद रहे
विचार व्यक्त करते हुए अधिवक्ता विजेंद्र सोनी ने कहा 1936 में जब प्रगतिशील लेखक संघ के पहले सम्मेलन की प्रेमचंद अध्यक्षता कर रहे थे उन्होंने कहा था कि लेखक स्वभाव से "प्रगतिशील होता है और जो ऐसा नहीं है वह लेखक नहीं है "
इसी तरह प्रसिद्ध दार्शनिक जयपाल सात्र ने इसी बात को रेखांकित किया था "जो बुद्धिजीवी समाज के लिए प्रतिबद्ध नहीं होता वह बुद्धिजीवी नहीं होता"
प्रेमचंद ने आगे भी यह बात कही थी कि मौजूदा समय में राजनीति के आगे लेखक को मशाल लेकर के चलना चाहिए !
जब हम अपने इर्द-गिर्द इस तरह राजनैतिक वातावरण को देखते हैं स्पष्ट हो जाता है याद जो राजनीत है उससे साहित्य बहुत दूर हो गई है, और जब जब राजनीति साहित्य से दूर हुई है" राजनीति आवारा हो गई! समारोह में अन्य वक्ताओं ने भी अपने विचार रखें मंच का संचालन डॉक्टर नीरज श्रीवास्तव ने किया।

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