जिले की आंगनवाडियां लापरवाह सिस्टम की बली चढ़ रहीं हैजिले की 90% आंगनवाड़ियों में बिजली की व्यवस्था नहीं है साथ ही अधिकांश में पीने के पानी की व्यवस्था और शौचालयों ना होने से नौनिहाल खुले में शौच कर रहे।
रिपोर्ट आदर्श दुबे
जिला मुख्यालय की आंगनबाड़ियों का हाल भी बेहाल हैं और आलम यह है कि एस डी एम आफिस से चंद कदमों की दूरी मैं स्थित वार्ड नम्बर 9 की आंगनबाड़ी का भवन जर्जर हो चुका है दीवालें टूट कर गिरने की स्थिति में है नौनिहालों को जान का खतरा बना हुआ है वही सोंचालय की टंकी भी आधी ही निर्मित हुई जिससे सोंचालय का उपयोग भी बच्चे नही कर पाते, बिजली की व्यवस्था भी नही
अब सवाल यह उठता है कि प्ले स्कूल की संख्याओं मैं लगातार इजाफा हो रहा है पर आंगनबाड़ियों मैं बच्चे कम क्यों होते जा रहे ? खुद आंगनबाड़ी कार्यकर्ता का माने तो अव्यवस्था के कारण लोग आंगनबाडी मैं बच्चों का दाखिला नही कराते सरकार बाल पोषण पर सक्रिय भूमिका निभाने की कोशिश कर रही आंगनबाड़ियों मैं सभी पोषक आहार के साथ अन्य सभी सुविधाओं के लिए बजट भी सुनिश्चित है ,बाबजूद सरकारी सिस्टम की बली चढ़ती आंगनबाड़ियों की परवाह किसी को नहीं। जिला अधिकारी वातानुकूलित कछ का लुफ्त उठा रहे और नोनिहलो के पास पंखा भी नही ।
महिला बाल विकाश जिला कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार सन 1988 -89 से 2014 तक बनी आंगनबाड़ियों मैं बिजली की फिटिंग भी नही की गई थी क्यों कि बिजली बिल का अलग से कोई मद नही पर 2014 के बाद बने नवीन भवनों में आंगनबाड़ी के अंदर बिजली फिटिंग की गई और बिजली उपलब्धता को अनिवार्य किया गया बाबजूद इसके जिले के अधिकांश 90 प्रतिशत आंगनबाड़ी बिजली को तरस रहीं ।
जब हमने जिला परियोजना अधिकारी से बात की तो उन्होंने जिला कलेक्टर द्वारा जिले भर की आंगनबाड़ियों की समूची जानकारी प्रपत्र के माध्यम से मंगवा कर जल्द व्यवस्था सुधारे
जानिए आंगनबाड़ी स्थापित करने के नियम
आंगनवाड़ी में उपलब्ध कराई जाने वाली सेवाएँ हैं
छह वर्ष से कम आयु के बच्चों की टीकाकरण
समस्त गर्भवती स्त्रियों के लिए प्रसव पूर्व देखभाल और टीकाकरण
छह वर्ष से कम आयु के बच्चों को अनुपूरक पोषण
गर्भवती और शिशुओं की देखभाल करने वाली स्त्रियों को अनूपूरक पोषण
15-45 वर्ष के आयु वर्ग की सभी महिलाओं के लिए पोषण और स्वास्थय शिक्षा
गर्भवती महिलाओं की प्रसवपूर्वक देखभाल तथा शिशुओं की देखरेख करने वाली माताओं की प्रसवोत्तर देखभाल
नए जन्मे शिशुओं तथा 6 वर्ष से कम आयु के बच्चों की देखभाल
कुपोषण अथवा बीमारी के गंभीर मामलों को अस्पतालों, समुदाय स्वास्थय केन्द्रों अथवा जिला अस्पतालों (पोषण पुनर्वास केंद्र/नवजात शिशु गहन देखरेख यूनिट) को भेजना।
3-6 वर्ष की आयु के बच्चों को अनौपचारिक विद्यालयपूर्व शिक्षा प्रदान करना
किसी आंगनवाड़ी केंद्र में क्या- क्या सुविधाएँ होनी चाहिए?
आंगनवाड़ी में निम्नलिखित सुविधाएँ होनी आवश्यक है:
एक भवन जो 63 वर्गमीटर/650 वर्ग फूट से कम न हो तथा कमरे XX3 वर्गमीटर के होने चाहिए।
बरामदा 6X1.5 वर्गमीटर होना चाहिए तथा वह बाधामुक्त होना चाहिए।
खेल का मैदान, खेल सामग्री तथा बाल हितैषी खिलौने
साफ – सफाई, जल और स्वच्छता सुविधाएँ
साफ और स्वच्छ रसोईघर – रसोई और स्टोर 6X3 वर्गमीटर होने चाहिए।
बाल - हितैषी शौचालय – 2 होने चाहिए (2X3 वर्गमीटर)
पहुँच के लिए ढलावदार सुविधाएँ
मजबूत तथा रिसावमुक्त छत वाला भवन
मजबूत खिड़कियाँ और दरवाजे
विद्युत कनेक्शन और सुविधा
फर्नीचर, पंखे, विस्तर
जल, बाल्टी, ब्रुश झाडु साबुन, अध्ययन सामग्री
रिपोर्ट आदर्श दुबे
जिला मुख्यालय की आंगनबाड़ियों का हाल भी बेहाल हैं और आलम यह है कि एस डी एम आफिस से चंद कदमों की दूरी मैं स्थित वार्ड नम्बर 9 की आंगनबाड़ी का भवन जर्जर हो चुका है दीवालें टूट कर गिरने की स्थिति में है नौनिहालों को जान का खतरा बना हुआ है वही सोंचालय की टंकी भी आधी ही निर्मित हुई जिससे सोंचालय का उपयोग भी बच्चे नही कर पाते, बिजली की व्यवस्था भी नही
अब सवाल यह उठता है कि प्ले स्कूल की संख्याओं मैं लगातार इजाफा हो रहा है पर आंगनबाड़ियों मैं बच्चे कम क्यों होते जा रहे ? खुद आंगनबाड़ी कार्यकर्ता का माने तो अव्यवस्था के कारण लोग आंगनबाडी मैं बच्चों का दाखिला नही कराते सरकार बाल पोषण पर सक्रिय भूमिका निभाने की कोशिश कर रही आंगनबाड़ियों मैं सभी पोषक आहार के साथ अन्य सभी सुविधाओं के लिए बजट भी सुनिश्चित है ,बाबजूद सरकारी सिस्टम की बली चढ़ती आंगनबाड़ियों की परवाह किसी को नहीं। जिला अधिकारी वातानुकूलित कछ का लुफ्त उठा रहे और नोनिहलो के पास पंखा भी नही ।
महिला बाल विकाश जिला कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार सन 1988 -89 से 2014 तक बनी आंगनबाड़ियों मैं बिजली की फिटिंग भी नही की गई थी क्यों कि बिजली बिल का अलग से कोई मद नही पर 2014 के बाद बने नवीन भवनों में आंगनबाड़ी के अंदर बिजली फिटिंग की गई और बिजली उपलब्धता को अनिवार्य किया गया बाबजूद इसके जिले के अधिकांश 90 प्रतिशत आंगनबाड़ी बिजली को तरस रहीं ।
जब हमने जिला परियोजना अधिकारी से बात की तो उन्होंने जिला कलेक्टर द्वारा जिले भर की आंगनबाड़ियों की समूची जानकारी प्रपत्र के माध्यम से मंगवा कर जल्द व्यवस्था सुधारे
जानिए आंगनबाड़ी स्थापित करने के नियम
आंगनवाड़ी में उपलब्ध कराई जाने वाली सेवाएँ हैं
छह वर्ष से कम आयु के बच्चों की टीकाकरण
समस्त गर्भवती स्त्रियों के लिए प्रसव पूर्व देखभाल और टीकाकरण
छह वर्ष से कम आयु के बच्चों को अनुपूरक पोषण
गर्भवती और शिशुओं की देखभाल करने वाली स्त्रियों को अनूपूरक पोषण
15-45 वर्ष के आयु वर्ग की सभी महिलाओं के लिए पोषण और स्वास्थय शिक्षा
गर्भवती महिलाओं की प्रसवपूर्वक देखभाल तथा शिशुओं की देखरेख करने वाली माताओं की प्रसवोत्तर देखभाल
नए जन्मे शिशुओं तथा 6 वर्ष से कम आयु के बच्चों की देखभाल
कुपोषण अथवा बीमारी के गंभीर मामलों को अस्पतालों, समुदाय स्वास्थय केन्द्रों अथवा जिला अस्पतालों (पोषण पुनर्वास केंद्र/नवजात शिशु गहन देखरेख यूनिट) को भेजना।
3-6 वर्ष की आयु के बच्चों को अनौपचारिक विद्यालयपूर्व शिक्षा प्रदान करना
किसी आंगनवाड़ी केंद्र में क्या- क्या सुविधाएँ होनी चाहिए?
आंगनवाड़ी में निम्नलिखित सुविधाएँ होनी आवश्यक है:
एक भवन जो 63 वर्गमीटर/650 वर्ग फूट से कम न हो तथा कमरे XX3 वर्गमीटर के होने चाहिए।
बरामदा 6X1.5 वर्गमीटर होना चाहिए तथा वह बाधामुक्त होना चाहिए।
खेल का मैदान, खेल सामग्री तथा बाल हितैषी खिलौने
साफ – सफाई, जल और स्वच्छता सुविधाएँ
साफ और स्वच्छ रसोईघर – रसोई और स्टोर 6X3 वर्गमीटर होने चाहिए।
बाल - हितैषी शौचालय – 2 होने चाहिए (2X3 वर्गमीटर)
पहुँच के लिए ढलावदार सुविधाएँ
मजबूत तथा रिसावमुक्त छत वाला भवन
मजबूत खिड़कियाँ और दरवाजे
विद्युत कनेक्शन और सुविधा
फर्नीचर, पंखे, विस्तर
जल, बाल्टी, ब्रुश झाडु साबुन, अध्ययन सामग्री

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