Friday, 14 August 2020

चुभती जलती बात मेरे साथ आदर्श दुबे 

सवाल है जिंदगी भर क्षेत्र की समस्याओं को लेकर अधिकारियों के चक्कर काटने बाले नेताओं के भविष्य का , राजनीति में भी अफशर शाही हावी क्या एक नेता सामाजिक नहीं? 

आदर्श दुबे✍️

सवाल उठता है पार्टी की यही गाइड लाइन हो कि अपने जमीनी कार्यकर्ता पार्टी समर्पित नेता को छोड़ रुतबेदार अधिकारी को ही चुनाव मैदान में उतारना है तो आखिर क्यों राजनीति शास्त्र विषय  पाठ्यक्रम में रखा गया, जब अधिकारियों का ही  स्वागत ये तो कैसी राजनीति किसी पार्टी का आप विरोध करते है कि दूसरे पार्टी से आये व्यक्ति को टिकट दिया जा रहा तो आप भी तो वही कर रहे जो आपका है उसे आप भी भूल कर अपने जमीनी कार्यकर्ता को छोड़ रुतबे और पैसे से मजबूत देख उसके साथ समझौता कर रहे .  

यदि सिद्धान्त जिंदा है तो कार्यकर्ता का सम्मान जरूरी है या रोबदारी का?  में कहता हूं पत्रकार, समाजविद,वकील ये भी तो इन्ही  से मदद की गुहार लगाते थक जाते है तो आपके उम्मीदवार  ये क्यों नही एक अधिकारी ही क्यों ?  स्तम्भो से ज्यादा क्षेत्र की समस्या को कौन जानता है पढ़ा लिखा कौन नही है क्या आम आदमी नही क्या एक व्यापारी ,आपका कार्यकर्ता  नही आखिर एक राजनैतिक व्यक्ति भी सामाजिक समस्याओं को समझने और सुलझाने  बाला होता है बिना तन्खवाह के वह अपने खर्चे पर समाज के लोगों की बात सुनता है समस्या सुलझाने की कोशिश करता है पर अब वह रुतबे के आगे कमजोर हो गया, उसका जीवन संघर्ष किसने खा लिया हमेशा की तरह अफशर शाही ने । 


कहते हो मुझे राजनीति में आने का शौक नही मैं समाज सेवा करना चाहता हूं अरे आपको तो सरकार सेवा करने का पैसा भी देती है उनका सामाजिक ,राजनैतिक हक क्यों छीन रहे जिन्होंने घर की जमीन जेब का पैसा लगा समाज की लड़ाई लड़ी तुम कहते हो मैने समाज का काम किया आपका काम है तो करोगे आपको सरकार इसी बात का पैसा देती है पर कितना करते हो पता है मरते हैं लोग परेशान रहते हैं ।

 पत्रकार ,समाजविद,नेता गाली खाते हैं की काम नही हुआ आपके कारण काम नही होता  अधिकारी नहीं है जो हर काम कर दे यदि एक अफसर को सेवा ही करनी है तो भगवान ने आपको बहुत अच्छा स्थान दिया है मलाई खाओ मेवा क्यों ढूढ रहे ,समाज सेवा ही करना है तो भगवान ने आपको स्थान दिया जहां मंत्री विधायक भी गुहार लगाते हैं आखिर माजरा क्या है?

मौका देख चौका है क्या।

और सिस्टम ठीक ही करना है तो पार्टी की गुलामी क्यों अपने साथियों को बोल इस्तीफा दिलाओ पार्टी बना काम करो पद तभी छोडूंगा जब टिकेट फाइनल होगी ये क्या बात?

No comments:

Post a Comment