Monday, 27 April 2020

जमा पूंजी खत्म हुई जो पैसा बचा उससे घर जाने के लिए खरीद ली साइकिल। पैरों में पड़ गए थे छाले मजबूरी में खरीदी सेकंड हैंड सायकल फिर सेकड़ो किलोमीटर का सफर।
रिपोर्ट आदर्श दुबे अनूपपुर।

छतीशगढ़ के रायपुर,बिलासपुर, रायगढ़  से सेकड़ो की संख्या में आ रहे मजदूर साइकल से अपने गंतव्य तक जा रहे कोई 500 किलोमीटर दूर यूपी तो कोई 300 किलोमीटर दूर सीधी सिंगरौली और कई सतना रीवा जा रहे  । 
साथ ही हजारों की संख्या में मजदूर रेलवे पटरियों से पैदल सफर करते सेकड़ो किलोमीटर पैदल चल घर पहुंच रहे।
लॉकडाउन के कारण मजदूर वर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है। छत्तीसगढ़ सीमा से जुड़े मध्यप्रदेश के अनुपपूर जिले से होकर  एक महीने में हजारों से मजदूर छत्तीसगढ़ से मध्यप्रदेश  और अन्य प्रदेशों की ओर गुजर रहे हैं। हर कोई लॉकडाउन से हुई परेशानी बताते हैं। 

आज  दोपहर रायपुर  से साइकिल पर सात युवक शहर से गुजरे, यह भी लॉकडाउन के कारण परेशान होकर घर लौट रहे थे।
यह रायपुर में किसी फैक्ट्री में काम करने वाले सातों युवको ने घर पहुंचने के लिए पूंजी जमा कर रखी थी लेकिन लॉकडाउन में आधे से ज्यादा खत्म हो गई। फिर युवकों ने घर जाने का मन बनाया। पैदल जाना मुश्किल था, इसलिए साइकिल खरीदकर घर की ओर निकले।  ये सभी किराए के मकान में रहते हैं, लॉकडाउन में फैक्ट्री में काम बंद हो गया, उस दिन से मालिक ने कुछ दिन इन्हें राशन दिया फिर जाने को कह दिया । इन्होंने घर पर पहुंचाने के लिए जो रुपए जोड़कर रखे थे, उसमें से ज्यादा तो खर्च हो गए। फिर अपने गांव जाने की सोची, लेकिन पैदल जाना मुश्किल था।  इन्होंने कुछ 150 किलोमीटर   पैदल सफर किया जब पैरों में छाले पड़ गए तो जमा पूंजी से रास्ते में पड़े बिलासपुर में सेकंड हैंड सायकल खरीदी। फिर साइकिल से ही घर के लिए निकल पड़े।


युवक बब्बू औरमिथलेश ने बताया कि रास्ते भर नजर आए दिहाड़ी मजदूर, पैदल ही कर रहे सैकड़ों किमी का सफर
उनमें से एक ने  बताया की 280 किलोमीटर से चले आ रहे एक जगह पेंड्रा के पास समाजसेवियों ने भोजन करवाया और अब अनुपपूर के चचाई शहर में भोजन किया है रास्ते में कही कुछ नही मिला जब वह निकले तो हाईवे पर जगह-जगह सैकड़ों दिहाड़ी मजदूर पैदल चलते हुए उन्हें दिखे  छत्तीसगढ़ के मजदूर इसमें शामिल थे। साधन नहीं होने के कारण वह मजबूरी में पैदल ही अपने घरों को जा रहे हैं। शासन-प्रशासन से बेहतर तो गांव और शहर के वह लोग है, जो तपती धूप में पैदल चल रहे मजदूरों को भोजन-पानी पहुंचा रहे हैं।

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