एक विधायक जो कोरोना वरियर्स का कर रहे काम। विधायक कोतमा कोरोना संक्रमण मैं भी दिन भर जनता का रखते हैं ध्यान। विधायक को जारी किया गया कारण बताओ नोटिस
रिपोर्ट आदर्श दुबे
अनूपपुर 26/04/20
जहां एक और कोरोना के डर का बहाना बता जन प्रतिनिधि घर में घुसे हुए ,वहीं कोतमा विधायक खाद्यान्न की व्यवस्था मैं जुटे हैं और गरीबों को घर में खाद्यान्न वितरण कर रहें खुद घर के लोग अपने परिजनों के अंतिम संस्कार में नही पहुंच रहे पर विधायक कोतमा उनके घर पहुंच संवेदना व्यक्त कर रहे हैं , क्या जिम्मेदारों और समाजसेवियों ने सत्ता जाते ही आंखों में पट्टी बांध ली ,पंच सरपंच पार्षद भी अपने घर से निकल कर क्षेत्र की जनता के लिए काम नहीं कर रहा वहां एक विधायक खाद्यान्न वितरण से लेकर क्षेत्र को अपने गाड़ी में जाकर खाद्यान्न वितरण से लेकर सैनिटाइजर करने का काम प्रदेश में ऐसे विधायक जो पूरे दिन कोरोनावायरस समय अपने घर से सुबह से निकलकर शाम तक क्षेत्र में करोना संक्रमण काल में जरूरतमंदो को खाद्यान्न की व्यवस्था में जुटे हैं नोटिस साबित करती हैं जनप्रतिनिधि घर में रहे और कोरेन्टाइन हो जाए क्योंकि करने वालों की कोई अहमियत नहीं सत्ता के नशे में चूर पदाधिकारी शिकायत भी कर रहे हैं तो क्या कि गरीबों को खाद्यान्न वितरित किया जाना गलत है अरे खाद्यान्न नहीं मिलेगा उन्हें तो जिएंगे कैसे अरे कोई तो जन प्रतिनिधि है जो उनकी सुन रहा इस पर राजनीति करना कितना सही है बाकी सब तो सत्ता जाते ही कोरेन्टाइन हो गए ।
रिपोर्ट आदर्श दुबे
अनूपपुर 26/04/20
जहां एक और कोरोना के डर का बहाना बता जन प्रतिनिधि घर में घुसे हुए ,वहीं कोतमा विधायक खाद्यान्न की व्यवस्था मैं जुटे हैं और गरीबों को घर में खाद्यान्न वितरण कर रहें खुद घर के लोग अपने परिजनों के अंतिम संस्कार में नही पहुंच रहे पर विधायक कोतमा उनके घर पहुंच संवेदना व्यक्त कर रहे हैं , क्या जिम्मेदारों और समाजसेवियों ने सत्ता जाते ही आंखों में पट्टी बांध ली ,पंच सरपंच पार्षद भी अपने घर से निकल कर क्षेत्र की जनता के लिए काम नहीं कर रहा वहां एक विधायक खाद्यान्न वितरण से लेकर क्षेत्र को अपने गाड़ी में जाकर खाद्यान्न वितरण से लेकर सैनिटाइजर करने का काम प्रदेश में ऐसे विधायक जो पूरे दिन कोरोनावायरस समय अपने घर से सुबह से निकलकर शाम तक क्षेत्र में करोना संक्रमण काल में जरूरतमंदो को खाद्यान्न की व्यवस्था में जुटे हैं नोटिस साबित करती हैं जनप्रतिनिधि घर में रहे और कोरेन्टाइन हो जाए क्योंकि करने वालों की कोई अहमियत नहीं सत्ता के नशे में चूर पदाधिकारी शिकायत भी कर रहे हैं तो क्या कि गरीबों को खाद्यान्न वितरित किया जाना गलत है अरे खाद्यान्न नहीं मिलेगा उन्हें तो जिएंगे कैसे अरे कोई तो जन प्रतिनिधि है जो उनकी सुन रहा इस पर राजनीति करना कितना सही है बाकी सब तो सत्ता जाते ही कोरेन्टाइन हो गए ।

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