Wednesday, 13 May 2026

अडानी पावर प्लांट के खिलाफ मिनी बैराज निर्माण के विरोध में भड़का जनाक्रोश, नदी में उतरकर युवाओं ने किया जल सत्याग्रह

 “विकास” के नाम पर केवई नदी का गला घोंट रहा अदानी प्रोजेक्ट: राम जी रिंकू मिश्रा

मिनी बैराज निर्माण के विरोध में भड़का जनाक्रोश, नदी में उतरकर युवाओं ने किया जल सत्याग्रह


रिपोर्ट आदर्श दुबे ✍️

कोतमा/अनूपपुर।
विधानसभा क्षेत्र कोतमा के छतई, मंटोलिया और उमरदा में प्रस्तावित 3200 मेगावाट थर्मल पावर प्लांट को लेकर अब विरोध खुलकर सामने आने लगा है। क्षेत्र की जीवनदायिनी मानी जाने वाली केवई नदी पर कथित रूप से जगह-जगह बनाए जा रहे मिनी बैराजों के खिलाफ ग्रामीणों और युवाओं का गुस्सा बुधवार को सड़क से नदी तक पहुंच गया।

केवई बचाओ आंदोलन” के बैनर तले चंगेरी में जिला पंचायत सदस्य राम जी रिंकू मिश्रा के नेतृत्व में युवाओं ने नदी में उतरकर जल सत्याग्रह किया और प्रशासन व सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। आंदोलनकारियों का आरोप है कि उद्योग और विकास के नाम पर नदी के प्राकृतिक प्रवाह को बाधित कर पूरे क्षेत्र को भविष्य के जल संकट की ओर धकेला जा रहा है।

जिला पंचायत member राम जी रिंकू मिश्रा ने तीखे शब्दों में कहा—“विकास के नाम पर अदानी प्रोजेक्ट केवई नदी का गला घोंट रहा है। यह केवल एक नदी नहीं, पूरे क्षेत्र की जीवनरेखा है। इसके साथ खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”

गांवों में गहराने लगा जल संकट

ग्रामीणों का कहना है कि केवई नदी वर्षों से क्षेत्र के गांवों की प्यास बुझाती रही है, लेकिन अब पावर प्लांट की जरूरतों के लिए नदी को बांधने की तैयारी की जा रही है। मिनी बैराज निर्माण के कारण निचले इलाकों तक पानी का प्रवाह कम होने लगा है, जिससे कई गांवों में जल संकट की आशंका गहराने लगी है।

लोगों का सवाल है कि आखिर किसकी अनुमति से नदी के सीने पर ये अवरोध खड़े किए जा रहे हैं?

जनसुनवाई पर भी उठे सवाल

आंदोलनकारियों ने आरोप लगाया कि पावर प्लांट की जनसुनवाई के दौरान केवई नदी से पानी लेने या मिनी बैराज निर्माण की कोई जानकारी नहीं दी गई थी। उस समय दावा किया गया था कि परियोजना के लिए सोन नदी से पाइपलाइन के माध्यम से पानी लाया जाएगा।

लेकिन अब जो हालात सामने आ रहे हैं, उन्होंने जनसुनवाई की पारदर्शिता और प्रशासनिक प्रक्रिया दोनों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है—

“जनता को कुछ और बताया गया, जमीन पर कुछ और किया जा रहा है।”

रोजगार नहीं, अब पानी भी छीना जा रहा

स्थानीय युवाओं का आरोप है कि उद्योग लगाने के नाम पर रोजगार के बड़े-बड़े वादे किए गए थे, लेकिन आज भी क्षेत्र के अधिकांश युवा बेरोजगार हैं। बाहरी लोगों को प्राथमिकता दी जा रही है, जबकि स्थानीय लोगों को नजरअंदाज किया जा रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि अब स्थिति ऐसी बन रही है कि न रोजगार मिला और न ही पानी बचेगा। इसी दोहरी मार ने युवाओं को आंदोलन के लिए मजबूर कर दिया है।

मुख्यमंत्री की यात्रा पर टिकी निगाहें

बुधवार को प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव कोतमा विधायक एवं राज्य मंत्री दिलीप जायसवाल के निवास पर आयोजित विवाह समारोह में शामिल होने क्षेत्र पहुंचे। ऐसे में लोगों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या मुख्यमंत्री केवई नदी में बनाए जा रहे मिनी बैराजों पर कोई ठोस निर्णय लेंगे या यह मुद्दा भी प्रशासनिक चुप्पी में दब जाएगा।

“यह लड़ाई अस्तित्व की है”

आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि केवई नदी के प्राकृतिक प्रवाह से छेड़छाड़ बंद नहीं हुई तो आंदोलन और उग्र होगा।

ग्रामीणों का कहना है—

“यह लड़ाई केवल पानी की नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के अस्तित्व की लड़ाई है।”

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