अमरकंटक माई की बगिया में श्रद्धालुओं से मची लूट ,दूर दूर से आने बाले परिक्रमावाशी भक्तों से अभद्रता और छलावा ।
मां नर्मदा की पवित्र पुण्य उद्गम स्थली अमरकंटक यूं तो युगो युगो से आस्था का केंद्र बना हुआ है यहां प्रतिवर्ष लाखों श्रद्धालु भक्तजन मां नर्मदा के दर्शन पूजन एवं स्नान के लिए आते हैं साथ ही यहां लाखों की संख्या में मां नर्मदा की परिक्रमा करने के लिए भारत के कोने कोने से भक्तजन आते हैं।
मां नर्मदा के उद्गम कुंड से लगभग 1 किलोमीटर की दूरी पर माई की बगिया नामक एक स्थान है यहां मां नर्मदा की परिक्रमा करने वाले लाखों की संख्या में परिक्रमावासी आते हैं। माई की बगिया में परिक्रमा वासियों को तट परिवर्तन हेतु तट परिवर्तन पूजा करवानी पड़ती है कहने का तात्पर्य है जो परिक्रमावासी मां नर्मदा की परिक्रमा करते हुए उत्तर तट रेवा सागर संगम मीठी तलाई से माई की बगिया पहुंचते हैं उन्हें यहां तट परिवर्तन यानि दक्षिण तट की परिक्रमा आरंभ करने से पूर्व तट बदल पूजा करवानी पड़ती है यह परिक्रमा वासियों के लिए अनिवार्य है।
विगत 1 साल से जिला प्रशासन द्वारा नगर परिषद अमरकंटक मैं कार्यरत एक भृत मनोज कांत तिवारी को माई की बगिया का पुजारी बनाकर बैठा दिया गया है। मनोज कांत तिवारी द्वारा माई की बगिया में तट परिवर्तन के लिए आए हुए परिक्रमा वासियों से अनाप-शनाप वसूली की जाती है जैसे पूजा के नाम पर, जल परिवर्तन करने के लिए, अखंड धूनी की भस्म देने के बहाने, कन्या पूजन के बहाने इत्यादि अनेक कारण बना कर परिक्रमा वासियों को लूटा जा रहा है। अगर कोई परिक्रमावासी पंडित जी के कहे अनुसार दान दक्षिणा नहीं देता तो उन्हें श्राप तथा डरा धमका कर पैसे की उगाही की जाती है। इसके अलावा माई की बगिया ने परिक्रमा वासियों द्वारा मां नर्मदा को भेंट स्वरूप दिए जाने वाला चढ़ोत्री कपड़ा (साड़ी), नारियल, सोना - चांदी शासन को जमा करने के स्थान अपने पास रख(अपने घर ले जाता है) लेता है । अमरकंटक नगर वासियों की ऐसी मांग है की इस भृत्त मनोजकांत तिवारी को माई की बगिया से हटाने की कृपा करें तथा इसके स्थान पर किसी योग्य व्यक्ति को बैठाए जो शासन को चढ़ोत्री का सारा सामान शासन के खजाने में जमा करें एवं परिक्रमा वासियों से दुर्व्यवहार ना करें।
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