अनूपपुर रहने लायक नहीं बचेगा?
महज 12 किलोमीटर में एक और थर्मल पावर प्लांट टोरेंट पावर ।
नदी, खेत और हवा खतरे में; थर्मल पावर से अनूपपुर का भविष्य धुंधला”
यह तय है कि यदि अनूपपुर के रक्सा कोलमि में आ रहे पावर प्लांट टोरेंट पावर यदि शुरू हुआ तो दिल्ली जैसा अनूपपुर का हाल होगा , सांस लेना होगा मुश्किल हो जाएगा ” कोयले के धुएँ में घुटेगी जिंदगी… दूसरा दिल्ली बन जाएगा अनूपपुर ”
“अनूपपुर का आसमान काला होने का खतरा, जनता बोली—हम हवा बेचने नहीं देंगे सामाजिक संगठन 7 जनवरी को कंपनी की जन सुनवाई के दिन करेगी विरोध प्रदर्शन।
महज 12 किमी में दूसरा थर्मल प्लांट! AQI 110 से 250 पहुँचने का खतरा — अनूपपुर रहने लायक नहीं बचेगा?
अनूपपुर। जिले के जैतहरी क्षेत्र में प्रस्तावित 1600 मेगावाट के नए थर्मल पावर प्रोजेक्ट ने पर्यावरण संकट को गहरा कर दिया है। पहले से संचालित एमबी पावर प्लांट के महज 12 किलोमीटर दायरे में दूसरा बड़ा थर्मल पावर प्रोजेक्ट स्थापित करने की तैयारी ने जिलावासियों की चिंता बढ़ा दी है।
पर्यावरण कार्यकर्ताओं का दावा है कि यदि दूसरा पावर प्लांट शुरू हुआ तो क्षेत्र का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) जो अभी औसतन 110 के आसपास रहता है, वह सीधे 250 तक पहुँच सकता है, जो स्वास्थ्य की दृष्टि से बेहद खतरनाक श्रेणी में आता है। ऐसी स्थिति में अनूपपुर की हवा दिल्ली और दूसरे प्रदूषित शहरों जैसी होने का खतरा है और यह जिला रहने लायक नहीं बचेगा, ऐसी आशंका लोग जता रहे हैं।
सोन नदी, किसानों की जमीन और हवा पर मंडरा रहा खतरा
सोन नदी पर बड़ा संकट महज 6 से 8 km की दूरी में दूसरा जल भराव।
प्रस्तावित पावर प्लांट के लिए प्रतिदिन भारी मात्रा में पानी की आवश्यकता होगी। यह पानी सोन नदी से लिया जाएगा, जिससे—प्रस्तावित पावर प्लांट सोन नदी के आसपास स्थापित किया जाना प्रस्तावित है। विशेषज्ञों के अनुसार प्लांट को प्रतिदिन भारी मात्रा में पानी की आवश्यकता होगी, जिससे नदी का प्राकृतिक प्रवाह प्रभावित होने, जलस्तर गिरने, सिंचाई बाधित होने और पीने के पानी पर खतरे की आशंका है। साथ ही गर्म तथा रसायनयुक्त पानी के डिस्चार्ज से नदी में रहने वाली मछलियों, जलजीवों और जैव विविधता पर भी गंभीर असर पड़ सकता है।
खेती और भूजल के लिए खतरा
थर्मल पावर प्लांट से निकलने वाली राख और धुएँ के कारण मिट्टी की उर्वरता घटने, फसल उत्पादन प्रभावित होने और भूजल स्तर पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है। किसानों का कहना है कि यदि यह परियोजना लागू हुई तो जीविका, कृषि और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था पर सीधा असर पड़ेगा।
जंगल और पर्यावरण संतुलन पर भी असर
इस क्षेत्र में जंगल और वन्यजीवों की उपस्थिति महत्वपूर्ण है। प्रदूषण, शोर, मशीनरी और विकास कार्यों के कारण वन्यजीव आवास प्रभावित होने का खतरा है, साथ ही पर्यावरण संतुलन बिगड़ने की आशंका भी व्यक्त की जा रही है।
स्वास्थ्य और प्रदूषण का बड़ा खतरा
विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार धुआं और राख हवा में मिलने से अस्थमा, श्वसन रोग, हृदय रोग और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। ग्रामीणों का कहना है कि अनूपपुर पहले से ही औद्योगिक प्रदूषण झेल रहा है, ऐसे में एक और पावर प्रोजेक्ट क्षेत्र को संकट में धकेल देगा।
जनसुनवाई में जनता दर्ज करेगी आपत्ति
7 जनवरी को प्रस्तावित जनसुनवाई को लेकर लोग तैयारी कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वे नदी, खेती, पर्यावरण और स्वास्थ्य की सुरक्षा के मुद्दों को मजबूती से उठाएंगे और परियोजना के खिलाफ अपनी आपत्ति दर्ज कराएंगे।
यह मुद्दा अब सिर्फ एक परियोजना का नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों, पानी, हवा और प्रकृति के अस्तित्व का सवाल बन चुका है।

No comments:
Post a Comment