Monday, 26 January 2026

जिला मुख्यालय में आयोजित शासकीय गणतंत्र दिवस समारोह में निजी विद्यालयों की उपेक्षा पर उठे सवाल ।

सामाजिक कार्यकर्ताओं और शिक्षकों ने चयन प्रक्रिया पर जताई आपत्ति।




अनूपपुर। उत्कृष्ट मैदान में आयोजित शासकीय गणतंत्र दिवस समारोह (26 जनवरी 2026) के दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रमों के चयन एवं पुरस्कार वितरण को लेकर चयन समिति की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। सामाजिक कार्यकर्ताओं, शिक्षकों एवं विद्यालय प्रबंधन से जुड़े लोगों का कहना है कि निजी विद्यालयों की सहभागिता सांस्कृतिक एवं राष्ट्रीय पर्वों के कार्यक्रमों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। निजी विद्यालयों के बच्चों की प्रस्तुतियाँ सदैव अनुशासित, उत्कृष्ट और प्रेरणादायक रहती हैं, इसके बावजूद उन्हें अपेक्षित सम्मान नहीं मिल पा रहा है।


बताया गया कि सामूहिक नृत्य प्रतियोगिता में तीन शासकीय एवं दो निजी विद्यालयों की प्रस्तुतियाँ हुईं, जिनका मूल्यांकन दर्शकों द्वारा भी सराहा गया, लेकिन तीनों पुरस्कार शासकीय विद्यालयों को प्रदान किए गए। केवल जूनियर वर्ग में एक पुरस्कार निजी विद्यालय को मिला। इसी प्रकार स्काउट गतिविधियों में निजी विद्यालयों की सहभागिता के बावजूद उन्हें कोई स्थान नहीं मिला, जिससे निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।


कई शिक्षकों एवं विद्यालय समितियों का आरोप है कि चयन समिति में बैठे कुछ लोग केवल सरकारी तंत्र को प्राथमिकता देते हैं, जिसके कारण बार-बार शासकीय विद्यालयों को ही मंच पर प्रमुख स्थान मिलता है। यह रवैया बच्चों की प्रतिभा के साथ अन्यायपूर्ण बताया गया है और इससे विद्यार्थियों के मनोबल पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

वक्ताओं ने कहा कि सार्वजनिक एवं राष्ट्रीय पर्वों पर आयोजित कार्यक्रमों में इस प्रकार का दोहरापन दुर्भाग्यपूर्ण है। यहाँ वास्तविक योग्यता की बजाय पक्षपात को बढ़ावा मिलने की आशंका व्यक्त की गई है।

सरस्वती शिशु उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के व्यवस्थापक, पत्रकार एवं सामाजिक कार्यकर्ता आदर्श दुबे सहित समाज के प्रबुद्धजनों ने मांग की है कि चयन प्रक्रिया पारदर्शी, निष्पक्ष और योग्यता आधारित हो, ताकि सभी विद्यालयों को समान अवसर मिल सके। अन्यथा विद्यालयों को अपने स्तर पर स्वतंत्र आयोजन करने पर विचार करना पड़ सकता है, जिससे बच्चों का आत्मविश्वास सुरक्षित रह सके।


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