अनूपपुर अजब है, अनूपपुर गजब! PWD का ‘कारनामा’—न्यायालय परिसर के शौचालय की पाइप सीधे नाली में!
अनूपपुर। अनूपपुर अजब है, अनूपपुर गजब है! सरकारी निर्माण और व्यवस्थाओं को लेकर एक ऐसा मामला सामने आया है, जो जिम्मेदार विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। मामला जिला न्यायालय परिसर में न्यायाधीश महोदय के लिए बनाए गए शौचालय से जुड़ा है, जहां आरोप है कि शौचालय से निकलने वाली मल-निकासी पाइप को सीधे मुख्य नाली से जोड़ दिया गया है।
आमतौर पर शौचालय की सीट से निकलने वाली पाइप को सेप्टिक टैंक या निर्धारित सीवेज सिस्टम से जोड़ा जाता है। सेप्टिक टैंक के ओवरफ्लो के पानी की निकासी की अलग व्यवस्था हो सकती है, लेकिन यदि शौचालय का मल सीधे खुली नाली में पहुंच रहा है तो यह स्वच्छता और जनस्वास्थ्य की दृष्टि से गंभीर चिंता का विषय बन जाता है।
नाली आपके घर के सामने से गुजरेगी, गंदगी कौन साफ करेगा?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस नाली में यह गंदगी छोड़ी जा रही है, वह आगे आम लोगों के घरों के सामने से होकर गुजरती है। ऐसे में नाली में मल-मूत्र और गंदा पानी पहुंचने से दुर्गंध, मच्छरों का प्रकोप और विभिन्न प्रकार के बैक्टीरिया एवं संक्रमण फैलने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
स्थानीय स्तर पर चिंता यह भी है कि नाली बनने के बाद से इसकी नियमित सफाई नहीं हुई है। जब लंबे समय से नाली की क्लीनिंग ही नहीं हुई तो उसमें किस तरह की गंदगी और जीव-जंतु पनप रहे होंगे, इसका अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।
‘नीम पर करेला’ वाली स्थिति
एक तरफ नाली की नियमित सफाई नहीं, दूसरी तरफ उसमें शौचालय के मल की निकासी—यह स्थिति ‘नीम पर करेला’ वाली कहावत को चरितार्थ करती नजर आती है। सवाल यह है कि आखिर इस तरह की व्यवस्था को किसने स्वीकृति दी? निर्माण के समय तकनीकी अधिकारियों ने इसका निरीक्षण नहीं किया? यदि किया तो ऐसी पाइपलाइन को खुली नाली से जोड़ने की अनुमति कैसे मिली?
PWD से जवाब जरूरी
मामला लोक निर्माण विभाग (PWD) से संबंधित बताया जा रहा है। ऐसे में विभाग को स्पष्ट करना चाहिए कि जिला न्यायालय परिसर में बनाए गए इस शौचालय की ड्रेनेज डिजाइन क्या थी, सेप्टिक टैंक की व्यवस्था कहां है और मल निकासी पाइप को मुख्य नाली से जोड़ने का निर्णय किस स्तर पर लिया गया।
यह सिर्फ निर्माण की गुणवत्ता का सवाल नहीं है, बल्कि सार्वजनिक स्वच्छता और आसपास रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य से जुड़ा विषय है। जिम्मेदार अधिकारियों को मौके का निरीक्षण कर यह सुनिश्चित करना चाहिए कि शौचालय की मल-निकासी की उचित व्यवस्था हो और मुख्य नाली की भी तत्काल सफाई कराई जाए।
अब देखना यह है कि PWD के इस ‘कारनामे’ पर जिम्मेदार अधिकारी संज्ञान लेते हैं या फिर गंदगी की यह कहानी इसी तरह नाली के रास्ते लोगों के घरों तक पहुंचती रहेगी।

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