जनजातीय शिक्षा के स्कूल शिक्षा विभाग में विलय पर पुनर्विचार की मांग तेज।
राज्यपाल ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र, अनुसूचित जनजाति आयोग ने भी समुचित परीक्षण का किया आग्रह।
भोपाल। प्रदेश में जनजातीय शिक्षा संबंधी गतिविधियों को स्कूल शिक्षा विभाग में हस्तांतरित करने के प्रस्ताव को लेकर अब पुनर्विचार की मांग तेज हो गई है। मध्यप्रदेश राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष रामलाल रौतेल द्वारा इस विषय पर महामहिम राज्यपाल मंगुभाई पटेल को पत्र लिखकर जनजातीय कार्य विभाग के अंतर्गत संचालित शैक्षणिक संस्थाओं की उपलब्धियों और जनजातीय हितों का उल्लेख करते हुए प्रस्तावित हस्तांतरण पर पुनर्विचार का आग्रह किया गया था।
आयोग अध्यक्ष के पत्र के संज्ञान में आने के बाद राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने 29 जून 2026 को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को अर्द्धशासकीय पत्र लिखकर विषय पर संवेदनशीलता और दूरदृष्टि के साथ विचार करने की अपेक्षा व्यक्त की है। राज्यपाल ने अपने पत्र में कहा है कि जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा केवल औपचारिक अध्ययन का विषय नहीं, बल्कि जनजातीय समाज की सांस्कृतिक पहचान, परंपराओं, भाषाओं, सामाजिक सशक्तिकरण और नेतृत्व निर्माण का महत्वपूर्ण माध्यम भी है।
राज्यपाल ने पत्र में उल्लेख किया है कि जनजातीय कार्य विभाग द्वारा संचालित आश्रम शालाएं, कन्या शिक्षा परिसर, एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय, छात्रावास एवं विशेष शैक्षणिक सहायता कार्यक्रमों ने दूरस्थ और आदिवासी अंचलों में शिक्षा के विस्तार में उल्लेखनीय योगदान दिया है। विभाग के विद्यार्थियों ने जेईई, नीट, क्लैट, एनडीए सहित विभिन्न राष्ट्रीय प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता अर्जित की है तथा खेलों और प्रशासनिक सेवाओं में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है।
वहीं अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष रामलाल रौतेल ने अपने पत्र में बताया है कि वर्तमान में जनजातीय कार्य विभाग के अंतर्गत हजारों विद्यालय संचालित हैं, जिनमें लाखों विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। वर्ष 2025-26 के बोर्ड परीक्षा परिणामों में विभागीय विद्यालयों का प्रदर्शन उल्लेखनीय रहा है। आयोग का मत है कि जनजातीय क्षेत्रों की विशिष्ट परिस्थितियों, सामाजिक-सांस्कृतिक आवश्यकताओं तथा अब तक प्राप्त सकारात्मक परिणामों को देखते हुए किसी भी प्रकार के प्रशासनिक पुनर्गठन अथवा हस्तांतरण से पहले व्यापक अध्ययन और विशेषज्ञों से परामर्श आवश्यक है।
इस पूरे प्रकरण में जनजातीय प्रकोष्ठ, राजभवन द्वारा आयोग अध्यक्ष के पत्र के संदर्भ में पत्र जारी कर अवगत कराया गया है कि राज्यपाल द्वारा विषय पर आवश्यक कार्रवाई हेतु मुख्यमंत्री को पत्र प्रेषित किया जा चुका है तथा संबंधित पत्र की प्रति सूचनार्थ भेजी जा रही है।
उल्लेखनीय है कि अब तक उपलब्ध पत्राचार में कहीं भी तत्काल हस्तांतरण को अंतिम रूप दिए जाने का निर्देश नहीं है, बल्कि राज्यपाल एवं अनुसूचित जनजाति आयोग दोनों ने विषय की गंभीरता को देखते हुए समुचित परीक्षण, व्यापक विचार-विमर्श और जनजातीय विद्यार्थियों के शैक्षणिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की आवश्यकता पर बल दिया है। इससे स्पष्ट है कि जनजातीय शिक्षा व्यवस्था के भविष्य को लेकर शासन स्तर पर पुनर्विचार और गहन परीक्षण की अपेक्षा व्यक्त की गई है।

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