Wednesday, 14 March 2018

सेवा ही कार्य :- वैष्णव शर्मा (asp अनूपपुर)

वैष्णव शर्मा की कलम से सेवा पर स्वान्त:  सुखाय चिन्तन:-----

पुलिस सेवा है।प्रशासनिक सेवा है। वन सेवा है। रेवेन्यु सेवा है। सभी में सेवा लिखा है।
सेवा कैसे हो ताकि सिस्टम मे रहते हुए भी जरूरतमंद की जरुरत पुरा करें, दुखियारा का दुख हरण करें।प्रत्येक दिन अनेक व्यक्ति अपना फरियाद लेकर कार्यालय मे आते है। जब ऐसे व्यक्ति मिले तो उसकी पहली सेवा यही होगा कि उन्हें समझकर यथायोग्य सम्मान के साथ उनकी पीड़ा सुना जाए, समझा जाए। उचित होने पर ससम्मान बैठाकर उन्हें पानी पिलाया जावे। इससे आईस ब्रेकिंग शीघ्रातिशीघ्र होता है।इस तरह उसकी पीड़ा पर प्रथम मरहम लग जाएगा।अतः प्रथम सेवा तो उसका काम किए बिना ही उसके साथ सान्त्वनापूर्ण योग्य व्यवहार से सम्भव हो जाता है।
    तदुपरांत उसकी समस्या का खुद की क्षमता के अनुसार निराकरण करना ही दुसरी सेवा है।यदि निराकरण हमारे क्षेत्राधिकार से ईतर है तो हम उन्हे उचित मार्गदर्शन कर सेवा का तीसरा अवसर प्राप्त कर सकते हैं।
 हमे उस पीडित व्यक्ति का अहसानमंद होना चाहिए क्योंकि वह हमें सेवा का मौका देकर हमें ऋणमुक्त कर रहा है। ऐसी नौकरी सेवामय हो जाएगी।इस भाव से नौकरी करने पर जीवन आसान हो जाएगा। कृपया एक बार शुरुआत करके तो देखें।
( अनूपपुर के एडिशनल एसपी वैष्णव शर्मा  जी द्वारा प्रस्तुत)
आदर्श दुबे अनूपपुर 

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