इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय द्वारा योग प्रोटोकॉल का अभ्यास कार्यक्रम आयोजित किया।
अमरकंटक / रिपोर्ट आदर्श दुबे ✍️
अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2022 के अवरोही गणना क्रम
कार्यक्रम के अन्तर्गत योग विज्ञान विभाग, इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय
जनजातीय विश्वविद्यालय अमरकंटक मध्य प्रदेश एवं
मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान आयुष मंत्रालय नई
दिल्ली, भारत सरकार के संयुक्त तत्वाधान में “स्वास्थ्य
आरोग्यता एवं विश्व शांति हेतु योग" विषय पर 9 अप्रैल
2022 को प्रातः 7:00- 9:00 बजे तक प्राचीन कल्चुरी मंदिर
समूह अमरकंटक भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा संरक्षित
परिसर में योग प्रोटोकॉल का अभ्यास कार्यक्रम आयोजित
किया।
दोपहर 2 बजे से 5 बजे तक विश्व विद्यालय के डॉ. लक्ष्मण
हावनूर में स्वास्थ्य आरोग्यता एवं विश्व शांति हेतु योग हेतु
योग के बहुआयाम विषक राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन
हाइब्रिड मोड में किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता
विश्वविद्यालय के मा. कुलपति प्रो. श्रीप्रकाशमणि त्रिपाठी जी
के द्वारा किया गया। एवं मुख्य अतिथि डॉ आइ. वी.
वासवारेड्डी, निदेशक, मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान,
आयुष मंत्रालय, भारत सरकार एवं सारस्वत अतिथि श्री वेद
प्रकाश शर्मा पूर्व पुलिस महानिरीक्षक एवं अध्यक्ष, योग
एसोसियेशन, मध्य प्रदेश थे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे विश्वविद्यालय के मा. कुलपति
प्रो. श्रीप्रकाशमणि त्रिपाठी जी “स्वच्छ, स्वस्थ्य, सुविज्ञ एवं
समर्थ भारत ही सम्पूर्ण योग है" आपने कहा कि योग ही
एक ऐसी शक्ति है जो सम्पूर्ण विश्व को एकता के सूत्र में बंधे
हुये है। आपने मनोबल,मनोरथ, मनोगत जो मानव को शुद्ध
बनात है योग मोक्ष निर्वाण एवं कैवल्य कि प्राप्ति करता है।
योग के माध्यम से सम्पूर्ण विश्व का कल्याण होता है।
सारस्वत अतिथि श्री वेद प्रकाश शर्मा पूर्व पुलिस
महानिरीक्षक एवं अध्यक्ष, योग एसोसियेशन, मध्य प्रदेश ने
अपने संबोधन में आधनिक जीवन में योग की आवश्यकता
योग के माध्यम से सम्पूर्ण विश्व का कल्याण होता है।
सारस्वत अतिथि श्री वेद प्रकाश शर्मा पूर्व पुलिस महानिरीक्षक एवं अध्यक्ष, योग एसोसियेशन, मध्य प्रदेश ने अपने संबोधन में आधुनिक जीवन में योग की आवश्यकता एवं उपादेयता के बारे में बताया साथ ही अष्टांग योग के सभी
पक्षो को बताया। योग वह विद्या है जो मानव का सर्वांगीण
विकास करती है।
मुख्य अतिथि डॉ आई. वी. बासवारेड्डी, निदेशक, मोरारजी
देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान, आयुष मंत्रालय, भारत सरकार ने
संबोधित करते हुये कहा कि योग हमारी प्राचीन धरोहर एवं
संस्कृति है। इसे निरंतर आगे बढ़ाने एवं बचाने के लिए प्रयासरत रहना चाहिए। जिससे हमारी सनातन परम्परा सुरक्षित रहे। साथ ही आपने शारीरिक एवं मानसिक शुद्धि के लिए घटस्त योग की बात कही।
प्रथम सत्र में विशेषज्ञ के रूप में प्रो. जे. यस. त्रिपाठी, पूर्व
विभागाध्यक्ष, काय चिकित्सा, आयुर्वेद संकाय, आयुर्विज्ञान
संस्थान, बी. एच. यू. “Psycho therapy" पर व्याख्यान,
आपने योग को बताते हुये मन की चंचलता एवं उसके निरोध
के बारे मे बताया; साथ ही ध्यान एवं प्राणायाम के नियमित
अभ्यास से मन के विभिन्न पक्ष (चिंता, भय, एवं तनाव) को
से दूर किया जा सकता है।
,तकनीकी व्याख्यान के दूसरे सत्र में प्रो. भगवंत सिंह,
विभागाध्यक्ष, दर्शन शास्त्र एवं योग विभाग पं. रविशंकर शुक्ल
विश्वविद्यालय रायपुर, ने अपने व्याख्यान में श्री रामचरित्र
मानस की चौपाइयों के माध्यम से पूरे संसार दर्शन की विद्या के
जनक आचार्य शंकर के बारे में बताया, जड़ एवं चेतन को भी
बताया है। साथ ही बताया की मनुष्य ही एक मात्र प्राणी है
जिसे दो शक्तियाँ प्राप्त है प्रथम विवेक ज्ञान दूसरा संकल्प
बताया है शारीरिक एवं मानसिक रूप से स्वस्थ्य रहने के लिए
श्रीमद भगवत गीता एवं सुश्रुत संहिता के अनुसार आहार की
भूमिका को बताया। अंत मे आपने बताया की योग वह पारस
पत्थर है जिसे छूते ही व्यक्ति परम गति को प्राप्त करता है।
तकनीकी व्याख्यान के तीसरे सत्र में डॉ. सुशील चन्द्रा ने दिया।



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